गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र के तटों से लेकर ऊपरी असम के चाय ज़िलों तक, राज्य भर की सिख संगतें प्रार्थना, लंगर और निष्काम सेवा के द्वारा गुरु नानक की शिक्षाओं की ज्योति जलाए रखती हैं।
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वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह — खालसा सर्वशक्तिमान का है, और विजय भी उन्हीं की है।
— सिख अभिवादन