बाबा दीप सिंह शहीद (26 जनवरी 1682 - 13 नवंबर 1757) सिख इतिहास के सबसे सम्मानित शहीदों में से एक हैं। बाबा दीप सिंह 12 मिसलों में प्रसिद्ध “शहीदां दी मिसल” के संस्थापक और नेता थे।
बाबा दीप सिंह दमदमी टकसाल (दमदमा विद्यापीठ) के पहले प्रमुख थे, जो सिखों की 300 वर्ष पुरानी धार्मिक पाठशाला है और जिसकी स्थापना श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने की थी। लंबे-चौड़े और बलिष्ठ बाबा दीप सिंह जी असाधारण रूप से वीर सिख थे।
निडर और साहसी संत-सिपाही बाबा दीप सिंह पंथ के लिए प्राण न्योछावर करने को सदा तत्पर रहते थे। बाबा दीप सिंह का जन्म 26 जनवरी 1682 को हुआ (कुछ अभिलेखों में यह 20 जनवरी दर्ज है) और लगभग 75 वर्ष की आयु में नवंबर 1757 में अमृतसर में लड़ते हुए उन्होंने शहादत पाई। लगभग 12 वर्ष की आयु से वे दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी के सान्निध्य में पले-बढ़े।
बाबा दीप सिंह ने अपना अधिकांश जीवन पंथ (सिख समुदाय) के रक्षक के रूप में बिताया। वे और बंदा सिंह बहादुर पंथ के सबसे सम्मानित शहीदों के रूप में जाने जाते हैं, जिन्होंने मिलकर समुदाय के लिए एक अनूठा और अद्भुत उदाहरण स्थापित किया, जो कई पीढ़ियों तक अनुकरणीय रहेगा।
बाबा दीप सिंह न केवल एक वीर और निर्भीक योद्धा थे, बल्कि एक अत्यंत बुद्धिमान विद्वान भी थे जिन्होंने कई भाषाओं में निपुणता प्राप्त की थी।