कोलकाता की संगत इस तीर्थ में एकत्र होती है, जो हर आगंतुक का प्रार्थना, लंगर और निष्काम सेवा से स्वागत करता है।
1930 के दशक में निर्मित, यह गुरु रविदास जी को समर्पित कोलकाता के सबसे पुराने गुरुद्वारों में से एक है