जीवन और सामाजिक सुधार
उनका जन्म 1479 में हुआ। गुरु अमरदास जी ने जाति-बंधनों और छुआछूत के अभिशाप के विरुद्ध आध्यात्मिक शक्ति के साथ संघर्ष किया। उन्होंने निःशुल्क रसोई, गुरु का लंगर, की परंपरा को सुदृढ़ किया और अपने अनुयायियों को — चाहे वे धनी हों या निर्धन, ऊँची जाति के हों या निम्न — एक साथ भोजन करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने सिखों के लिए आनंद कारज विवाह पद्धति आरंभ की, जिसने हिंदू रीति का स्थान लिया। उन्होंने सिखों में सती प्रथा को भी समाप्त किया और स्त्रियों के लिए परदा प्रथा को भी हटाया।