पवित्र नगरी और विवाह भजन
उनका जन्म 1534 में हुआ। गुरु जी ने अमृतसर नगर की स्थापना की और सिखों के पवित्र नगर अमृतसर में प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर के निर्माण का आरंभ किया। उन्होंने मुस्लिम सूफ़ी संत मियाँ मीर से हरमंदिर साहिब की आधारशिला रखवाई।
यह मंदिर सभी दिशाओं से और हर समय सबके लिए खुला रहता है। सिखों की विवाह पद्धति, आनंद कारज, चार फेरों — लावां — पर आधारित है, जो गुरु रामदास जी द्वारा रचित चार बंदों की वाणी है।