यह नानकसर परंपरा का पालन करता है, जो बाबा नंद सिंह जी की शिक्षाओं पर आधारित भक्तिमय उपासना और नाम सिमरन पर बल देती है।
नानकसरी उपासना में सामान्यतः निशान साहिब का ध्वज नहीं फहराया जाता, राजनीतिक प्रतीकवाद से दूर रहा जाता है, और सेवा प्रायः ब्रह्मचारी स्वयंसेवक करते हैं
लंगर का अनूठा तरीका: यह नानकसर गुरुद्वारा परिसर में लंगर नहीं पकाता, न ही दान-पात्र (गोलक) रखता है। इसके बजाय श्रद्धालु स्वेच्छा से घर का बना लंगर लाते हैं, जिसमें प्रायः देसी घी के पराठे, सब्ज़ी, दाल, मिठाइयाँ और फल शामिल होते हैं। बचा हुआ भोजन सेक्टर 16, 32 और पीजीआई के अस्पतालों में बाँटा जाता है, ताकि कोई भी आगंतुक भूखा न लौटे