यह गुरुद्वारा लगभग 1517 ई. में गुरु नानक देव जी की उदासियों के दौरान कश्मीर के आगमन की स्मृति में है। यह श्रीनगर के एक मनोरम और ऐतिहासिक भाग में स्थित है, जो अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों से घिरा है।
यह गुरुद्वारा लगभग 1517 ई. में गुरु नानक देव जी की उदासियों के दौरान कश्मीर के आगमन की स्मृति में है। यह श्रीनगर के एक मनोरम और ऐतिहासिक भाग में स्थित है, जो अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों से घिरा है।