यह गुरुद्वारा बुढलाडा-रत्तियाँ मार्ग पर गाँव बरेह में बुढलाडा से 7 किमी दक्षिण-पूर्व की दूरी पर स्थित है।
श्री गुरु तेग बहादुर जी मालवा क्षेत्र के भ्रमण के दौरान गाँव कोट धरमू से यात्रा करते हुए इस स्थान पर पधारे।
गुरु जी इस गाँव में 4 महीने रुके और एक तालाब के किनारे विश्राम किया। गाँव वालों ने श्री गुरु तेग बहादुर जी को पानी की भारी कमी के बारे में बताया, जिसके कारण फ़सलें खराब होती थीं।
गुरु तेग बहादुर ने गाँव को पूर्व की ओर स्थानांतरित करने का सुझाव दिया। ग्रामीणों ने गुरु जी के कहे अनुसार किया और बेहतर खेती कर सके।
गुरु तेग बहादुर ने ग्रामीणों को आशीर्वाद दिया और बुढलाडा शहर तथा फिर गाँव गोबिंदपुरा की ओर आगे बढ़े।