गुरुद्वारा श्री शहीदां साहिब लधेवाल होशियारपुर ज़िले के लधेवाल में स्थित है।
अंततः हताश होकर वह आनंदपुर साहिब में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के दरबार में गया और गुरु साहिब को अपनी व्यथा सुनाई।
कथा सुनकर गुरु गोबिंद सिंह ने साहिबज़ादा बाबा अजीत सिंह को आदेश दिया कि ज़बर ख़ान को गिरफ़्तार करें और देवी दास की पत्नी को उसके पति को लौटा दें।
गुरु साहिब ने बाबा अजीत सिंह को 100-200 वीर सिंहों के साथ भेजा। होशियारपुर में भाई रतन सिंह ने साहिबज़ादा अजीत सिंह जी की गिरफ़्तारी और हमले की योजना बनाने में सहायता की। शाम को साहिबज़ादा बाबा अजीत सिंह ने ज़बर ख़ान के निवास पर धावा बोला। लड़ाई के बाद ज़बर ख़ान घायल होने पर भी गिरफ़्तार कर बाँध लिया गया। बाबा अजीत सिंह ने पठान ज़बर ख़ान और देवी दास की पत्नी को कुछ सिखों के साथ आनंदपुर भेज दिया।
ज़बर ख़ान को आनंदपुर में उसके कुकर्मों की सज़ा दी गई। साहिबज़ादा बाबा अजीत सिंह ने शहीद हुए सिंहों का अंतिम संस्कार किया। शहीदों का अंतिम संस्कार गुरुद्वारा श्री शहीदां साहिब लधेवाल और गुरुद्वारा श्री हरियाँ वेलाँ साहिब में किया गया। बाबा रतन सिंह भी घायल हुए और कुछ दिन बाद उनका देहांत हो गया।