EN|हिन्दी|ਪੰਜਾਬੀ
Sikhs In India Logo
गुरु हरकिशन जी ब्राह्मण ते छज्जू
गुरु हरकिशन जी की कहानियाँ
ज्ञान और विनम्रता की एक कहानी
Guru Harkrishan Ji and Chhaju

1. विद्वान ब्राह्मण

एक बार, गुरु हरकिशन जी दिल्ली में ठहरे हुए थे। एक अभिमानी ब्राह्मण विद्वान गुरु के ज्ञान की परीक्षा लेने आया। उसका मानना था कि केवल शास्त्रों का अध्ययन करने वाले ही सच्चे ज्ञान को समझ सकते हैं।

2. गुरु जी का उत्तर

गुरु हरकिशन जी, जो अभी बालक ही थे, मुस्कुराए और बोले, "यदि वाहेगुरु की कृपा हो, तो एक साधारण व्यक्ति भी पवित्र ग्रंथों के अर्थ समझा सकता है।" ब्राह्मण हँसा और इस विचार को चुनौती दी।

3. छज्जू का प्रवेश

गुरु जी ने छज्जू नामक एक साधारण जल-वाहक को बुलाया, जो अशिक्षित और विनम्र था। गुरु जी ने अपना हाथ छज्जू के सिर पर रखा और उससे ब्राह्मण द्वारा चुनी गई पंक्तियों का अर्थ समझाने को कहा।

4. दिव्य ज्ञान का प्रवाह

सबके आश्चर्य के बीच, छज्जू ने शास्त्रों की व्याख्या सुंदरता से की। ब्राह्मण स्तब्ध रह गया। उसने पहले शर्म से और फिर सम्मान से अपना सिर झुका लिया। उसे एहसास हुआ कि सच्चा ज्ञान अहंकार से नहीं, दिव्य कृपा से आता है।

💡 संदेश

📚 कहानी की सीख

"गुरु हरकिशन जी ने सिखाया कि सच्चा ज्ञान वाहेगुरु से आता है, अहंकार या प्रतिष्ठा से नहीं।"

यह पृष्ठ साझा करें