श्री गुरु नानक देव जी और भाई मरदाना जी
यह चित्र गुरु और शिष्य के संबंध को नहीं, बल्कि गुरु और सच्चे साथी के संबंध को दर्शाता है। भाई मरदाना, गुरु नानक देव जी के बचपन के मित्र थे। वे एक रबाबी थे और हर विषाद (धार्मिक यात्रा) में गुरु जी के साथ रहे।
जहाँ गुरु नानक देव जी अपना उपदेश दिया करते थे, वहाँ भाई मरदाना जी संगीत के माध्यम से उसे जनता तक पहुँचाते थे। यह संगत आगे बढ़ते हुए कीर्तन परंपरा की नींव बनी।
गुरु नानक देव जी का संदेश अत्यंत स्पष्ट था। ईश्वर एक है, जाति और धर्म का भेदभाव व्यर्थ है, और मानवता की सेवा ही सच्ची उपासना है।
भाई मरदाना जी इस शिक्षा के जीवंत स्वरूप थे। यद्यपि वे एक मुस्लिम परिवार में जन्मे थे, फिर भी वे सिख इतिहास के सबसे सम्मानित व्यक्तित्वों में से एक बने।
"ਏਕੁ ਪਿਤਾ ਏਕਸ ਕੇ ਹਮ ਬਾਰਿਕ ॥
ਤੂ ਮੇਰਾ ਗੁਰਹਾਈ ॥"
(हम सब एक ही पिता की संतान हैं; तू ही हमारा सच्चा गुरु है।)
समस्त मानवता की एकता ही गुरु नानक देव जी की अमर शिक्षा है।
वाहेगुरु जी का ख़ालसा, वाहेगुरु जी की फ़तेह।