संबद्ध - श्री गुरु नानक साहिब जी, श्री गुरु हरकृष्ण साहिब जी
गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब करनाल श्री गुरु नानक साहिब जी से जुड़ा है, जो अपनी पहली उदासी के दौरान करनाल पधारे थे।
उस समय करनाल के लोग कई मुस्लिम पीरों से प्रभावित थे, जिन्होंने चमत्कार दिखाकर अपनी ख्याति बनाई थी। पीरों का सरदार पीर अबू अली शाह कलंदर था।
जब गुरु नानक आए तो वे एक बाग़ में ठहरे। इस बाग़ में एक छोटा टीला था, जिस पर गुरु नानक बैठकर शबद गाते थे।
गुरु नानक के कीर्तन से कई श्रद्धालु जुड़ गए। मुस्लिम पीरों को यह पसंद नहीं आया और उनमें से कुछ ने जाकर पीर अबू अली शाह कलंदर से शिकायत की। जो सुना उससे पीर अबू अली शाह क्रोधित हुआ और दीवार पर सवार होकर गुरु से मिलने चल पड़ा।