श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी भाई सुरमुख सिख से मिलने इस स्थान पर पधारे।
दिल्ली जाते हुए श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी जुलाई 1673 में करहाली में रुके। गुरु हरगोबिंद 100 सिख घुड़सवारों के साथ यात्रा कर रहे थे।
गुरु जी और सिख सुरमुख नामक एक व्यक्ति की छोटी मिट्टी की झोंपड़ी के पास रुके। सुरमुख, जो आगे चलकर भाई सुरमुख सिख कहलाए, एक संक्रामक बीमारी से ग्रस्त थे और दूसरों को संक्रमित करने के भय से उन्हें गाँव करहाली के बाहर रहना पड़ता था।
कोई भी भाई सुरमुख सिख के पास नहीं रहना चाहता था और लोग उनसे कतराते थे। केवल कुछ दयालु लोग ही उन्हें भोजन देते थे।
गुरुद्वारा श्री गुरु अर्जन साहिब अते गुरु तेग बहादुर साहिब करहाली