गाँव दोद जैतो शहर से 13 किमी बाहर, जैतो-बरनाला मार्ग के किनारे स्थित है।
श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी मालवा क्षेत्र की यात्राओं के दौरान इस स्थान पर पधारे।
श्री गुरु गोबिंद सिंह जी आलमगीर से 'खिदराणे की ढाब' (जो अब मुक्तसर साहिब के नाम से जाना जाता है) की ओर जाते हुए इस स्थान पर पधारे।
श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी मेहराज के युद्ध के बाद यहाँ पधारे और यहाँ से दरोली भाई की गए।
श्री गुरु गोबिंद सिंह जी आलमगीर से 'खिदराणे की ढाब' (जो अब मुक्तसर साहिब के नाम से जाना जाता है) की ओर जाते हुए इस स्थान पर पधारे। कहा जाता है कि गुरु जी जलाल नामक एक निकटवर्ती गाँव से होकर आए। इसके बाद गुरु गोबिंद सिंह दोपहर वहाँ बिताने के लिए गाँव वंडर गए।