संबद्ध - श्री गुरु नानक साहिब जी, श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी
जब गुरु नानक लंबवाली पधारे तो उन्होंने भाई मरदाना से पास के एक साधु से जल लाने को कहा। साधु ने सहायता करने से मना कर दिया।
भाई मरदाना तीन बार साधु के पास गए, पर हर बार साधु ने जल देने से मना कर दिया। चौथी बार गुरु नानक भाई मरदाना के साथ गए। गुरु नानक ने साधु से कहा, 'साधु, तुम अजगर (सरल) की तरह बैठे हो और आने-जाने वालों को जल तक नहीं पिला सकते'।
गुरु नानक के वचन सुनकर साधु घबरा गया, उसे श्राप लगा हुआ था। साधु गुरु नानक के चरणों में गिर पड़ा और बोला, 'मुझे पता है कि मुझे श्राप मिला है, मैं कैसे बचूँगा?' गुरु नानक ने कहा कि वे अपने छठे रूप में लौटकर उसे मुक्त करेंगे।
मेहराज के युद्ध के बाद गुरु हरगोबिंद साहिब जी अपनी पुत्री के निकटवर्ती गाँव मल्ला पधारे, जहाँ