गुरुद्वारा श्री बुर्ज साहिब धारीवाल पंजाब के गुरदासपुर ज़िले में बढ़ते शहर धारीवाल के पूर्व में स्थित है।
श्री गुरु अर्जन साहिब जी बाबा श्री चंद से मिलने गाँव बारठ पधारे। गुरु साहिब ने श्री चंद से चर्चा की और फिर अमृतसर लौट गए।
अमृतसर लौटते समय गुरु साहिब धारीवाल में रुके, जहाँ गुरुद्वारा श्री बुर्ज साहिब धारीवाल स्थित है। उस समय यहाँ घना जंगल और एक छोटा तालाब था।
जब गुरु जी के आगमन का समाचार फैला, तो ग्रामीण आसपास एकत्र हो गए। गुरु अर्जन साहिब जी ने लोगों को नाम सिमरन और वंड छकना (दूसरों के साथ बाँटकर खाना) का महत्व बताया।
संगत में एक व्यक्ति कोढ़ से पीड़ित था। उसने गुरु जी से रोग से मुक्ति दिलाने की विनती की। गुरु अर्जन ने उससे कहा कि तालाब में स्नान करे और उसमें से मिट्टी निकालकर उस स्थान पर डाले जहाँ गुरुद्वारा साहिब स्थित है। उस व्यक्ति ने ऐसा ही किया और उसका रोग ठीक हो गया।