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सिख्स इन इंडिया का लोगो
सिख विरासत एवं पवित्र स्थल

गुरुद्वारा ज्योतिसर साहिब पातशाही छठी

खुराना — संगरूर, पंजाब
आस्था  ·  सेवा  ·  संगत  ·  विरासत

श्री गुरु तेग बहादुर जी 1616 में मालवा क्षेत्र की अपनी यात्रा के दौरान इस स्थान पर पधारे और एक तालाब के किनारे कुछ समय रुके।

गुरुद्वारा श्री ज्योतिसर साहिब पातशाही छठी
खुराना
संगरूर  ·  पंजाब

श्री गुरु तेग बहादुर जी 1616 में मालवा क्षेत्र की अपनी यात्रा के दौरान इस स्थान पर पधारे और एक तालाब के किनारे कुछ समय रुके।

गुरुद्वारा श्री ज्योतिसर साहिब पातशाही छठी गाँव खुरंज के बाहरी छोर पर स्थित है।

श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी मालवा क्षेत्र की यात्रा के दौरान यहाँ पधारे, यात्रा करते हुए उस स्थान से जहाँ से

। जब गुरु हरगोबिंद गाँव में आए तो गुरु जी की ओर किसी का ध्यान नहीं गया। गुरु हरगोबिंद जाने ही वाले थे कि माई कर्मो ने सुना कि गुरु जी गाँव में हैं।

माई कर्मो गुरु हरगोबिंद के पीछे गईं और गाँव की लाज रखते हुए उनसे रुकने और ठहरने की विनती की। गुरु हरगोबिंद इस गुरुद्वारे के स्थान पर रुके और बेरी के वृक्ष के नीचे बैठे। माई कर्मो जी और संगत ने गुरु हरगोबिंद को नमन किया और दूध भेंट किया। गुरु हरगोबिंद ने माई कर्मो को पुत्र का आशीर्वाद दिया। बेरी का वह वृक्ष आज भी गुरुद्वारा परिसर में मौजूद है।

स्मृति
श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी
पता
Khuranj, Sangrur, Punjab, India
"
वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह — खालसा सर्वशक्तिमान का है, और विजय भी उन्हीं की है।
— सिख अभिवादन
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