यह गुरुद्वारा सुनाम से 45 किमी दक्षिण में जाखल-पटियाला रोड पर मूनक में स्थित है।
श्री गुरु तेग बहादुर जी 1665 में आनंदपुर साहिब से बिहार और असम जाते हुए इस स्थान पर पधारे।
गुरु तेग बहादुर गाँव गुरने कलां पहुँचे, फिर गोबिंदपुरा गए और गाँव लेहल कलां पहुँचकर गुरु जी एक ऊँचे टीले पर बैठे।
पास ही अपने खेतों में काम कर रहा अदक नामक एक किसान आया, गुरु जी को नमन किया और अपनी सेवाएँ अर्पित कीं।
गुरु जी ने भाई अदक का मार्गदर्शन किया और कुछ समय ठहरने के बाद गुरु जी अपने सिखों के साथ मूनक की ओर चल पड़े।