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सिख विरासत एवं पवित्र स्थल

गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब जी

श्री हरमंदिर साहिब जी [स्वर्ण मंदिर] — अमृतसर, पंजाब
आस्था  ·  सेवा  ·  संगत  ·  विरासत

अमृतसर, भारत का स्वर्ण मंदिर (श्री दरबार साहिब अमृतसर), अमृतसर के सबसे प्रसिद्ध गुरुद्वारों में से एक है और यह न केवल सिखों का एक केंद्रीय धार्मिक स्थल है, बल्कि सार्वभौमिक भाईचारे और समानता का प्रतीक भी है…

गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब जी
श्री हरमंदिर साहिब जी [स्वर्ण मंदिर]
अमृतसर  ·  पंजाब

अमृतसर, भारत का स्वर्ण मंदिर (श्री दरबार साहिब अमृतसर), अमृतसर के सबसे प्रसिद्ध गुरुद्वारों में से एक है और यह न केवल सिखों का एक केंद्रीय धार्मिक स्थल है, बल्कि सार्वभौमिक भाईचारे और समानता का प्रतीक भी है। यह जाति, पंथ या नस्ल की परवाह किए बिना सभी पृष्ठभूमि के लोगों का स्वागत करता है, ताकि वे स्वतंत्र रूप से आध्यात्मिक शांति और धार्मिक संतुष्टि प्राप्त कर सकें। इसके अतिरिक्त, यह सिख समुदाय की विशिष्ट पहचान, गौरव और विरासत का प्रतीक है।

श्री दरबार साहिब के दर्शन, विचारधारा तथा अंदरूनी और बाहरी सुंदरता का वर्णन करना एक गहन प्रयास है जो शब्दों से परे है; यह अपने आप में एक अनुभव है। श्री गुरु अमरदास जी के मार्गदर्शन में, श्री गुरु रामदास जी ने 1577 ईस्वी में श्री दरबार साहिब के अमृत सरोवर (पवित्र सरोवर) की खुदाई आरंभ की। बाद में 15 दिसंबर 1588 को श्री गुरु अर्जन देव जी ने सरोवर को ईंटों से पक्का करवाया और श्री दरबार साहिब के निर्माण का भी शुभारंभ किया।

सिखों के धर्मग्रंथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पहला प्रकाश 16 अगस्त 1604 ईस्वी को श्री दरबार साहिब में हुआ, जिसमें बाबा बुड्ढा जी को पहला मुख्य ग्रंथी नियुक्त किया गया।

स्वर्ण मंदिर की वास्तुकला में अनूठी सिख विशेषताएँ हैं। आसपास की भूमि से नीचे स्तर पर बना होने के कारण यह समानता और विनम्रता की शिक्षा देता है। चारों दिशाओं से इसके चार प्रवेश द्वार इस पावन स्थान की सर्वसमावेशी प्रकृति के प्रतीक हैं, जो हर वर्ग के लोगों का समान रूप से स्वागत करते हैं, और इसे अमृतसर के शीर्ष गुरुद्वारों में से एक बनाते हैं।

पता
Atta Mandi, Katra Ahluwalia, Amritsar - 143006, Punjab - India
फ़ोन
+91 183 255 3957; 0183-2553953
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वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह — खालसा सर्वशक्तिमान का है, और विजय भी उन्हीं की है।
— सिख अभिवादन
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