गुरुद्वारा श्री पिपली साहिब अमृतसर के पुतलीघर क्षेत्र में स्थित है, जो श्री गुरु रामदास जी, श्री गुरु अर्जन देव जी और श्री गुरु हरगोबिंद जी की स्मृति को संजोए हुए है।
श्री गुरु रामदास जी: लाहौर के मार्ग पर रणनीतिक स्थान होने के कारण गुरु रामदास जी ने पीपल (बरगद) के वृक्ष की छाया में एक कुआँ बनवाया।
श्री गुरु अर्जन देव जी: जब गुरु अर्जन देव जी ने गुरुगद्दी संभाली, तो पृथी चंद विरोधी हो गया और उसने दान का रुख अपनी ओर मोड़ लिया, जिससे लंगर के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं बची।
श्री गुरु रामदास जी के देहांत के बाद जब भाई गुरदास जी आगरा से लौटे, तो उन्होंने देखा कि लंगर में केवल प्याज़ और चने थे। बीबी भानी ने पृथी चंद की करतूतें बताईं, जिस पर भाई गुरदास जी और बाबा बुड्ढा जी इस स्थान पर आए और काबुल, कंधार तथा पश्चिम से आ रही संगत से दान माँगा। उन्होंने दान इकट्ठा कर गुरु साहिब को सौंपा। गुरु साहिब और माता जी ने फिर संगत की सेवा और देखभाल की।
श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी: अपने पहले युद्ध में गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने इसी भूमि पर मुखलिस खान को पराजित किया। युद्ध के बाद उन्होंने अपनी कमरकसा खोली, जल पिया और इसी स्थान पर विश्राम किया।