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सिख्स इन इंडिया का लोगो
सिख विरासत एवं पवित्र स्थल

गुरुद्वारा सोहियाणा साहिब

सोहियाणा — बरनाला, पंजाब
आस्था  ·  सेवा  ·  संगत  ·  विरासत

गुरु तेग बहादुर जी ने 1665 में यहाँ एक करीर के वृक्ष से अपना घोड़ा बाँधा; वह वृक्ष आज भी गुरुद्वारे में सुरक्षित है।

गुरुद्वारा श्री सोहियाणा साहिब पातशाही नौवीं
सोहियाणा
बरनाला  ·  पंजाब

श्री गुरु तेग बहादुर जी 1665 में हंडियाया गाँव से ढौला होते हुए इस स्थान पर आए। गुरु साहिब गाँव के बाहर रुके और अपना घोड़ा एक करीर और एक जंड के वृक्ष से बाँधा। करीर का वृक्ष आज भी गुरुद्वारे में सुरक्षित है।

जब गुरु तेग बहादुर जी ने गाँव का नाम पूछा, तो लोगों ने बताया कि यह सोहीवाल, या मोहीवाल है। गुरु साहिब ने उत्तर दिया: ना सोही ना मोही, एह होसी ठेही ठेही — न सोही, न मोही; यह टीला-दर-टीला बन जाएगा।

बाद में अहमद शाह अब्दाली की सेनाओं द्वारा लूटे और नष्ट किए जाने के बाद गाँव उजड़ गया, और यहाँ कहे गए वचन आगे घटित हुई घटनाओं के प्रकाश में याद किए जाते हैं।

स्मृति
श्री गुरु तेग बहादुर जी
पता
Near Khudi Kurd, Barnala, Punjab, India
"
वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह — खालसा सर्वशक्तिमान का है, और विजय भी उन्हीं की है।
— सिख अभिवादन
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