श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी धमोट से सौंटी जाते हुए गाँव इकोलाहा आए। गुरु साहिब यहाँ एक रात ठहरे और अगले दिन अपनी यात्रा आगे बढ़ाई।
इस गुरुद्वारे की स्थापना पहली बार 1964-65 में गुरु हरगोबिंद के गाँव आगमन की स्मृति में अफ़्रीका जा बसे भाई रल्ला सिंह, माई महताब कौर और अन्य ग्रामीणों द्वारा की गई। आरंभ में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के प्रकाश के लिए केवल एक कमरा था।
संगत की कृपा से गुरुद्वारे के पास 50 बीघे ज़मीन है। 20 वैसाख (वह तिथि जब गुरु हरगोबिंद पधारे थे) हर वर्ष एक बड़े मेले के साथ मनाई जाती है।