संबद्ध - श्री गुरु नानक साहिब जी, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी
पुष्कर में श्री गुरु नानक साहिब जी 1509 में और गुरु गोबिंद सिंह 1706 में पधारे। पहले गुरु के आगमन की स्मृति वाला स्थान पूर्व में गुरु नानक धर्मशाला कहलाता था, किंतु अब गुरुद्वारा सिंह सभा के नाम से जाना जाता है और श्री गुरु सिंह सभा अजमेर की एक शाखा के रूप में कार्य करता है। यह बस अड्डे के निकट एक दो-मंज़िला समतल छत वाली इमारत में स्थित है।
गुरु गोबिंद सिंह 1706 में राजपूताना की अपनी यात्राओं के दौरान पुष्कर पधारे (ज्ञानी ब्रह्म सिंह, अजमेर, तीर्थराज पुष्कर और सिख गुरु, स्पोक्समैन वीकली, गुरु नानक विशेषांक 1981) और एक सप्ताह ठहरे। चेतन दास नामक एक पुजारी ने उनकी सेवा की।
गुरु के ठहरने से पावन हुए स्थान को गोबिंद घाट कहा जाता था, किंतु अब उसका नाम बदलकर गांधी घाट कर दिया गया है।
एक मंडप के नीचे रखी पत्थर की पट्टिका पर आज भी गुरमुखी, देवनागरी, फ़ारसी और रोमन लिपियों में गोबिंद घाट खुदा हुआ है। पहले घाट के प्रवेश-द्वार की पहली मंज़िल पर इसी स्थान पर निर्मले सिखों द्वारा संचालित एक गुरुद्वारा था, जो अब मौजूद नहीं है।