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सिख्स इन इंडिया का लोगो
सिख विरासत एवं पवित्र स्थल
गुरुद्वारे चमकौर साहिब में
पंजाब
आस्था  ·  सेवा  ·  संगत  ·  विरासत

चमकौर साहिब की संगत इन ऐतिहासिक पावन स्थानों पर एकत्र होती है, जो हर आगंतुक का प्रार्थना, लंगर और निष्काम सेवा से स्वागत करते हैं।

गुरुद्वारा श्री कतलगढ़ साहिब जी
गुरुद्वारा श्री कतलगढ़ साहिब जी
स्थान: चमकौर साहिब, पंजाब

युद्ध-स्थल: वह ऐतिहासिक स्थान जहाँ 7/22 दिसंबर 1704 को चमकौर के दूसरे युद्ध के दौरान सबसे भीषण लड़ाई हुई।

गुरुद्वारा श्री गढ़ी साहिब जी
गुरुद्वारा श्री गढ़ी साहिब जी
स्थान: चमकौर साहिब, पंजाब

यह स्थान उस क़िलेनुमा दो-मंज़िला “गढ़ी” को चिह्नित करता है जो राय जगत सिंह और रूप चंद ने दिसंबर 1705 में आनंदपुर साहिब छोड़ने और सरसा नदी पार करने के बाद गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके साथी सिखों के लिए उपलब्ध कराई थी…

गुरुद्वारा श्री दमदमा साहिब जी
गुरुद्वारा श्री दमदमा साहिब जी
स्थान: चमकौर साहिब, पंजाब

वह ठीक स्थान जहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी चमकौर साहिब पहुँचकर 6 दिसंबर 1705 (6 पोह 1761 बिक्रमी) की शाम को सबसे पहले उतरे

गुरुद्वारा श्री रणजीतगढ़ साहिब जी
गुरुद्वारा श्री रणजीतगढ़ साहिब जी
स्थान: चमकौर साहिब, पंजाब

चमकौर का पहला युद्ध, जो 15 जनवरी 1703 (16 माघ 1759 बिक्रमी) को लड़ा गया, जब गुरु गोबिंद सिंह जी और खालसा की एक छोटी टुकड़ी ने दो शाही सेनापतियों—सैयद बेग और अलिफ़ ख़ान—से लोहा लिया, जिन्हें भड़काया गया था…

गुरुद्वारा श्री तड़ी साहिब जी
गुरुद्वारा श्री तड़ी साहिब जी
स्थान: चमकौर साहिब, पंजाब

यह गुरुद्वारा 7–8 दिसंबर 1705 (7–8 पोह) की रात गुरु गोबिंद सिंह जी के रणनीतिक पलायन की स्मृति में है।

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वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह — खालसा सर्वशक्तिमान का है, और विजय भी उन्हीं की है।
— सिख अभिवादन
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