वह ठीक स्थान जहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी चमकौर साहिब पहुँचकर 6 दिसंबर 1705 (6 पोह 1761 बिक्रमी) की शाम को सबसे पहले उतरे
यह भूमि राय जगत सिंह और उनके छोटे भाई रूप चंद की थी। जगत सिंह ने आरंभ में आश्रय देने से मना कर दिया, किंतु रूप चंद—सह-स्वामी होने के नाते—ने मुआवज़ा प्राप्त करने के बाद गुरु गोबिंद सिंह जी को ठहरने की अनुमति दी
ऐतिहासिक अभिलेखों में पुराने वृत्तांतों में बुद्धि चंद और ग़रीबू जैसे अन्य नाम भी वैकल्पिक ज़मींदारों के रूप में मिलते हैं
माना जाता है कि गुरु जी इससे पहले 1702 में कुरुक्षेत्र जाते समय इस स्थान पर आए थे