1705 में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी मुक्तसर साहिब जाते हुए दीना गाँव पधारे।
गुरु गोबिंद सिंह की देखभाल चौधरियों लखमीर और शमीर ने बड़े सम्मान से की, जो श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के समर्पित सिख राय जोध के पोते थे।
गुरु गोबिंद सिंह ने यहाँ उच्च दा पीर की अपनी नीली पोशाक उतार दी। गुरु गोबिंद सिंह यहाँ दीना में 3 महीने और 13 दिन ठहरे।
जब सरहिंद के नवाब और बच्चों के बर्बर हत्यारे वज़ीर ख़ान ने सुना कि गुरु गोबिंद सिंह यहाँ हैं, तो उसने चौधरी को आदेश दिया कि गुरु को गिरफ़्तार करके सरहिंद भेज दे।
अटल विश्वास वाले शमीर ने अपने भाई से सलाह करके उत्तर लिखा, "जैसे आप अपने 'पीर' का बहुत सम्मान करते हैं, वैसे ही हम भी अपने गुरु की सेवा को समर्पित हैं। चूँकि वे सबसे प्रेम करते हैं, हम आपके आदेश का पालन नहीं कर सकते।"