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सिख्स इन इंडिया का लोगो
सिख विरासत एवं पवित्र स्थल

गुरुद्वारा गोदावरीसर साहिब

ढिलवां कलां — फ़रीदकोट, पंजाब
आस्था  ·  सेवा  ·  संगत  ·  विरासत

जब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने आलमगीर से अपनी यात्रा शुरू की, तो वे कोट कपूरा नगर पहुँचे।

गुरुद्वारा श्री गोदावरीसर साहिब
ढिलवां कलां
फ़रीदकोट  ·  पंजाब

जब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने आलमगीर से अपनी यात्रा शुरू की, तो वे कोट कपूरा नगर पहुँचे।

मुगल सेना ने क़ुरान से विश्वासघात किया था और उस पर झूठी क़समें खाई थीं। मुगल गुरु गोबिंद सिंह को पकड़ने या मारने के लिए उनका पीछा कर रहे थे।

कोट कपूरा में गुरु गोबिंद सिंह ने चौधरी कपूरा (कोट कपूरा के संस्थापक) से कहा कि वे मुगलों से लड़ने के लिए गुरु जी को अपने क़िले का उपयोग करने दें, पर कपूरा ने सहायता करने से इनकार कर दिया।

इसलिए गुरु गोबिंद सिंह और उनके शेष सिंह गाँव ढिलवां कलां पहुँचे, जो उस समय ढिलवां सोढियां के नाम से जाना जाता था।

कौल सोढी ढिलवां कलां में रहते थे। कौल सोढी पृथी चंद (जो श्री गुरु अर्जन साहिब जी के बड़े भाई थे) के वंशज थे।

स्मृति
श्री गुरु गोबिंद सिंह जी
पता
Dhilwan Kalan, Faridkot, Punjab, India
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वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह — खालसा सर्वशक्तिमान का है, और विजय भी उन्हीं की है।
— सिख अभिवादन
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