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सिख्स इन इंडिया का लोगो
सिख विरासत एवं पवित्र स्थल

गुरुद्वारा गुरुसर साहिब

महल कलां — बरनाला, पंजाब
आस्था  ·  सेवा  ·  संगत  ·  विरासत

महल कलां में गुरुद्वारा श्री गुरुसर साहिब छठे गुरु, श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के आगमन और कराहा मल की सेवा की स्मृति को संजोए हुए है।

गुरुद्वारा श्री गुरुसर साहिब पातशाही छठी
महल कलां
बरनाला  ·  पंजाब

श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी लिट्टराँ गाँव से महल कलां पहुँचे। उस समय आसपास का इलाका घनी झाड़ियों और वृक्षों से ढका था, और गाँव वाले गुरु साहिब का स्वागत करने बाहर नहीं आए।

कुछ देर विश्राम के बाद गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने प्रस्थान की तैयारी की। करहा मल नाम का एक ग्रामीण, यह सुनकर कि गुरु साहिब पास ही हैं, सेवा के लिए आया और भोजन-पानी लाया। गुरु साहिब उसकी सेवा से प्रसन्न हुए और बोले कि करहा के बर्तन — उसके कड़ाहे — सदा भरे रहेंगे।

गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने कहा कि इस स्थान पर पहली प्रार्थना अनसुनी रहेगी और उसके बाद की हर प्रार्थना सुनी जाएगी। गाँव की संगत तब से इसे सत्य मानती आई है।

स्मृति
श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी
पता
Mehal Kalan Sehjra Link Road, Mehal Kalan, Punjab 148104, India
"
वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह — खालसा सर्वशक्तिमान का है, और विजय भी उन्हीं की है।
— सिख अभिवादन
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